Dr Zakir Naik - Vs Sri Sri Ravi Shankar Debate Full In Hindi =link=
यह ऐतिहासिक कार्यक्रम में आयोजित किया गया था। चर्चा का मुख्य विषय था: "इस्लाम और हिंदू धर्म के पवित्र ग्रंथों के आलोक में ईश्वर की अवधारणा" ।
मुख्य बिंदु और वक्ताओं का परिचय
यह संवाद एक सार्वजनिक डिबेट के रूप में आयोजित किया गया था। स्थान: बैंगलोर, भारत। वर्ष: 2006।
Hosts many archival versions of the full debate, often divided into parts for easier viewing.
बहस के मुख्य बिंदु और विश्लेषण: dr zakir naik vs sri sri ravi shankar debate full in hindi
"न तस्य प्रतिमा अस्ति" (उस ईश्वर की कोई छवि, मूर्ति या रूप नहीं है)।
डॉ. नाइक ने हिंदू ग्रंथों का हवाला देते हुए सिद्ध करने का प्रयास किया कि मूल हिंदू धर्म भी केवल एक ही ईश्वर की पूजा की बात करता है। उन्होंने श्वेताश्वतारा उपनिषद (अध्याय 6, श्लोक 9) का संदर्भ दिया: "न तस्य कश्चित् पतिरस्ति लोके..." (उस ईश्वर का कोई माता-पिता या स्वामी नहीं है)।
इस बहस में कई महत्वपूर्ण बिंदु थे जिन पर चर्चा हुई:
यह बहस वैचारिक मतभेदों को शांतिपूर्ण तरीके से प्रस्तुत करने का एक बड़ा उदाहरण बनी। Can’t copy the link right now
बहस के दौरान ग्रंथों के अनुवाद और उनकी व्याख्या को लेकर भी दोनों पक्षों में मतभेद दिखे। डॉ. नाइक ने जहां शब्दों के शाब्दिक अर्थ पर जोर दिया, वहीं श्री श्री ने उनके व्यापक और आंतरिक अर्थ को समझने की वकालत की।
हाँ, इस लेख में दिए गए मुख्य बिंदुओं के अलावा, इस बहस के कुछ हिस्सों का हिंदी अनुवाद सोशल मीडिया और ब्लॉग पोस्ट पर उपलब्ध है।
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उन्होंने तर्क दिया कि जैसे सूर्य की किरणें अलग-अलग रंगों में दिख सकती हैं, वैसे ही एक ही ईश्वर को विभिन्न रूपों और नामों से पूजा जा सकता है। their policies apply.
बहस की मुख्य रूपरेखा (Debate Structure)
को बेंगलुरु के पैलेस ग्राउंड्स में एक ऐसी बहस हुई जिसने दुनिया भर के करोड़ों लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. जाकिर नाइक और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर के बीच यह ऐतिहासिक संवाद आयोजित किया गया था। इस बहस का मुख्य विषय था: "पवित्र ग्रंथों के आलोक में हिंदू धर्म और इस्लाम में ईश्वर की अवधारणा" (The Concept of God in Hinduism and Islam in the Light of Sacred Scriptures) ।
इस बहस का कोई अंतिम "विजेता" घोषित नहीं किया गया, क्योंकि दोनों पक्षों के समर्थकों ने अपने-अपने गुरु के तर्कों को श्रेष्ठ माना। हालांकि, इस संवाद ने दुनिया भर के विचारकों को धर्मग्रंथों के तुलनात्मक अध्ययन के प्रति प्रेरित किया।
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